
'विरोध करने वाले करोड़ों की जमीन पर कब्जा करके बैठे, यह सबको पता है...', वक्फ बिल पर बोले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू
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अगर वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को ऐसे ही डिक्लेयर कर देगा कि यह वक्फ की जमीन है तो उसका तो हिसाब-किताब होना चाहिए. हम ट्रांसपेरेंसी ला रहे हैं. जो आम मुसलमान हैं- चाहे वो दरगाह के हों, चाहे वो अलग-अलग संगठन में हों... सब लोग समर्थन कर रहे हैं. वक्फ अमेंडमेंट बिल का विरोध करने वाले वो लोग हैं, जो करोड़ों की वक्फ जमीन को कब्जा करके बैठे हैं.
केंद्र की मोदी सरकार 2 अप्रैल को लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश कर सकती है. इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन विधेयक से जुड़े सवालों पर खुलकर जवाब दिया है. उन्होंने वक्फ पर विपक्ष के विरोध पर बात कही और केरल में बिशपों के समर्थन का स्वागत किया है.
किरेन रिजिजू ने कहा, यह बहुत बड़ी बात है. क्योंकि कैथोलिक बिशप ने इसको पढ़ा है और अच्छे से इसका अध्ययन किया है. कई मुसलमान भी मेजोरिटी में वक्फ बिल को सपोर्ट कर रहे हैं. सब लोग इसका समर्थन कर रहे हैं. चाहे हिंदू हों, मुस्लिम हों, जैन हों, बौद्ध हों... सब लोग इसका समर्थन कर रहे हैं.
'जमीन का हिसाब-किताब होना चाहिए'
अगर वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को ऐसे ही डिक्लेयर कर देगा कि यह वक्फ की जमीन है तो उसका तो हिसाब-किताब होना चाहिए. हम ट्रांसपेरेंसी ला रहे हैं. जो आम मुसलमान हैं- चाहे वो दरगाह के हों, चाहे वो अलग-अलग संगठन में हों... सब लोग समर्थन कर रहे हैं. वक्फ अमेंडमेंट बिल का विरोध करने वाले वो लोग हैं, जो करोड़ों की वक्फ जमीन को कब्जा करके बैठे हैं और यह चीज सबको मालूम है, इसलिए जब आप आम मुसलमान को पूछेंगे तो सब लोग इस बिल का समर्थन कर रहे हैं.
मंत्री ने कहा, यह लोग मुसलमान को गुमराह करके उनको वोट बैंक बनाना चाहते हैं. अगर हम ऐसा कोई असंवैधानिक कानून लाएंगे तो क्या सुप्रीम कोर्ट चुप बैठेगा? यह देश संविधान से चलता है. इसलिए मैं हाथ जोड़कर विनती करता हूं कि अगर आपको बिल का विरोध करना है तो आप तर्क रखिए. मैं हर तर्क का जवाब दूंगा.
'जमीनों को कौन छीन रहा?'

एयरफोर्स ऑफिसर की पत्नी ने बताया कि 14 मार्च की रात को भी उनके घर में घुसपैठ की कोशिश हुई थी लेकिन तब एसएन मिश्रा ने बदमाशों को वहां से भगा दिया था. इसके बाद उन्होंने वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी सुरक्षा का मुद्दा उठाया था लेकिन तब फोर्स ने विभागीय स्तर पर इस मामले को देखने की बात कही थी.

संसद का काम कानून बनाना है और लोकसभा-राज्यसभा ने अपना काम कर दिया है. अब यह बिल संविधान के मुताबिक है या नहीं यह तय करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास है. बिल को चुनौती देने वाले और इसका विरोध करने वाले बहुत हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस बिल को संविधान की कसौटी पर तौलेगा और फिर तय करेगा कि यह बिल संवैधानिक है या नहीं.

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