
बदला गया था 'रंग दे बसंती' का क्लाइमैक्स सीन, आमिर खान को इस बात की थी परेशानी
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आमिर खान की साल 2006 में आई फिल्म रंग दे बसंती सभी को पसंद आई थी. फिल्म को जिस तरह से प्रेजेंट किया गया वो शानदार था. लेकिन इसका क्लाइमैक्स जैसा दिखाया गया था, वैसा पहले लिखा नहीं गया था. एक्टर ने बताया कि उन्होंने कुछ बदलाव किए थे.
सुपरस्टार आमिर खान अपनी फिल्मों के अलावा अपने तेज दिमाग और सही सूझ-बूझ के लिए भी जाने जाते हैं. उन्होंने अपने फिल्मी करियर में कई बार ऐसे फैसले लिए हैं जिनसे उन्हें फायदा हुआ है. ऐसे कई मौके आए हैं जब आमिर ने अपनी समझदारी से अपनी फिल्मों की किस्मत बदली है. फिर चाहे वो उनकी एकलौती डायरेक्ट की हुई फिल्म 'तारे जमीन पर हो' या राकेश ओमप्रकाश मेहरा की 'रंग दे बसंती'. आमिर ने अपनी इन फिल्मों में कई सारे बदलाव किए हैं.
'रंग दे बसंती' का क्लाइमैक्स था कुछ और, आमिर ने किया खुलासा
हाल ही में एक बातचीत के दौरान आमिर ने फिल्म 'रंग दे बसंती' से जुड़ा मजेदार खुलासा किया है. उन्होंने बताया है कि पहले फिल्म का क्लाइमैक्स कुछ और लिखा गया था. लेकिन एक्टर को उसमें कुछ बातें समझ नहीं आई थीं. वो डायरेक्टर और राइटर के साथ बैठे और फिल्म के क्लाइमैक्स को थोड़ा बदला. आमिर ने कहा, 'रंग दे बसंती में लास्ट के कुछ 40 मिनट असलियत में काफी अलग तरीके से लिखे गए थे. पहले ऐसा था कि डिफेंस मिनिस्टर को शूट किया जाता है और फिर सभी अलग-अलग रास्ते भाग जाते हैं.'
'दो लोग रेलवे स्टेशन जाते थे, कोई कहीं भागता था ताकि कोई पकड़ा ना जाए. फिर उसके बाद दिखाते कि कैसे सभी को पकड़ते हैं और बाद में एक साथ मार देते हैं. ये फिल्म का अंत था. तो इस पर मेरे दिमाग में ये सवाल था कि इन लोगों ने कुछ गलत किया था क्या? उनके मन में कुछ गलत हुआ था? नहीं, उन्हें लगता है कि जो उन्होंने किया वो सही किया. तो फिर क्यों भाग रहे हैं. मैंने कहा कि एक तो उन्हें भागना नहीं चाहिए. मैंने जिसे मारा है मेरे हिसाब से मैंने बिलकुल सही किया है.'
गोली मारकर भागते सभी किरदार, आमिर ने कराया स्क्रिप्ट में सुधार
आमिर आगे कहते हैं कि फिल्म में सभी किरदार वापस कैंटीन आकर टीवी पर मिनिस्टर के मरने की खबर देखते हैं. तब उस मिनिस्टर को भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है जिसे देखकर सभी चौंक जाते हैं. तभी उन्हें एहसास होता है कि जो उन्होंने किया वो ठीक नहीं किया. एक्टर ने कहा कि उनकी फिल्म इंडिया की पहली फिल्म थी जिसने खुद कहा था कि किसी को मारने से कोई हल नहीं मिलने वाला है. आमिर ने कहा, 'इस खबर के बाद सभी में झगड़ा होता है, तभी वो सोचते हैं कि हमें रेडियो स्टेशन जाकर लोगों से बात करनी चाहिए.'

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