
'दफ्तर में बगैर कपड़ों के घूमते थे और...', कारोबारी ब्रायन जॉनसन पर लगे सनसनीखेज आरोप
AajTak
जॉनसन की कंपनी के पूर्व कर्मचारियों का आरोप हैं कि जॉनसन अक्सर काम के घंटों के दौरान ऑफिस में कम कपड़ों में घूमते थे और यहां तक कि अपनी सेक्सुअल एक्टिविटीज के बारे में भी चर्चा करते थे. वह ब्लूप्रिंट की महिला कर्मचारियों के साथ भी छेड़खानी वाली बातें करते थे, जिससे कर्मचारी असहज हो जाते थे.
टेक बिजनेसमैन और एंटी-एजिंग एक्सपेरिमेंट को लेकर चर्चा में रहने वाले ब्रायन जॉनसन के खिलाफ वर्किंग प्लेस पर गलत बर्ताव करने के आरोप लगे हैं. अरबपति कारोबारी पर अपने स्टार्टअप ब्लूप्रिंट के ऑफिस में बगैर कपड़ों के घूमने और सह कर्मियों के साथ सेक्सुअल टॉक करने के आरोप हैं. उनकी कंपनी के पूर्व कर्मचारियों ने अब गोपनीयता समझौते को चुनौती दी है.
महिला कर्मियों से छेड़छाड़ के आरोप
इन आरोपों के बाद ब्रायन जॉनसन फिर से सुर्खियों में हैं. कंपनी के पूर्व कर्मचारियों ने जॉनसन पर वर्किंग प्लेस का माहौल बिगाड़ने का आरोप भी लगाया है. पूर्व कर्मचारियों के मुताबिक जॉनसन अक्सर काम के घंटों के दौरान कम कपड़ों में घूमते थे और यहां तक कि अपनी सेक्सुअल एक्टिविटीज के बारे में भी चर्चा करते थे. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, वह ब्लूप्रिंट की महिला कर्मचारियों के साथ भी छेड़खानी वाली बातें करते थे, जिससे कर्मचारी असहज हो जाते थे.
जॉनसन की ओर से अपनी पब्लिक इमेज और लोगों को कंट्रोल करने के लिए गोपनीयता समझौतों की जांच के बीच ये आरोप सामने आए हैं. कम से कम तीन पूर्व कर्मचारियों ने नेशनल लेबर रिलेशंस बोर्ड (NLRB) में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें इन समझौतों की वैधता को चुनौती दी गई है और जॉनसन पर असहमति को दबाने का आरोप लगाया गया है.
साइन कराते हैं सीक्रेट कॉन्ट्रैक्ट
पूर्व कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील मैट ब्रुएनिग ने कहा कि जॉनसन इन समझौतों का इस्तेमाल करके लोगों को चुप रहने के लिए मजबूर करते थे. उन्होंने कहा कि उनका मसकद कॉन्ट्रैक्ट की आड़ में कर्मचारियों की असहसमति को दबाना था. जॉनसन की पूर्व पर्सनल असिस्टेंट जेमी कॉन्टेन्टो ने कहा कि वह डॉक्यूमेंट सही नहीं लगे थे लेकिन अपनी नौकरी खोने के डर से मजबूरी में इस पर साइन किए थे.

जय स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में हेल्थ पॉलिसी के प्रोफेसर हैं, नेशनल ब्यूरो ऑफ इकनॉमिक्स रिसर्च में एक रिसर्चर एसोसिएट हैं और स्टैनफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर इकनॉमिक पॉलिसी रिसर्च, स्टैनफोर्ड फ्रीमैन स्पोगली इंस्टीट्यूट और हूवर इंस्टीट्यूशन में एक वरिष्ठ फेलो हैं. वह स्टैनफोर्ड के सेंटर फॉर डेमोग्राफी एंड इकोनॉमिक्स ऑफ हेल्थ एंड एजिंग को निर्देशित करते हैं.

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ब्रिटेन के किंग चार्ल्स की ऐसे वक्त पर तारीफ की, जब वो यूरोप और खासकर नाटो से दूरी बना रहा है. ये कयास भी लग रहे हैं कि अमेरिका 18वीं सदी के बाद पहली बार कॉमनवेल्थ देशों में शामिल हो सकता है. ये एक डिप्लोमेटिक रणनीति भी हो सकती है ताकि यूरोप में अमेरिका के लिए आए तनाव के तार कुछ ढीले पड़ें.

महरंग, सम्मी और सीमा बलोचिस्तान की इन बेटियों ने इंतजार की इंतहा के बाद इकंलाब का रास्ता चुना है. सीधे सवाल करने का रास्ता अख्तियार किया है. लेकिन ये प्रतिरोध हिंसक नहीं बल्कि गांधी की सदाकत से ताकत पाता है. इन लोगों ने अपने निजी दुखों को एक सामूहिक संघर्ष में बदला, और पाकिस्तानी सेना और सरकार के उस सिस्टम को हिला दिया, जो दशकों से बलोचिस्तान की आवाज को कुचलता आया है. ये नाम आज बलोचिस्तान में प्रतिरोध के प्रतीक बन चुके हैं.