
'NEET से जुड़ी मौतों के लिए DMK जिम्मेदार', तमिलनाडु में छात्रा की सुसाइड पर AIADMK हमलावर
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पलानीस्वामी ने कहा,
NEET की तैयारी कर रही तमिलनाडु की एक 21 साल की छात्रा ने आत्महत्या कर ली, जिससे एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. AIADMK नेता ए पलानीस्वामी ने राज्य की सत्ताधारी DMK सरकार पर आरोप लगाया कि NEET से जुड़ी मौतों के लिए DMK जिम्मेदार है. उन्होंने मुख्यमंत्री स्टालिन को निशाने पर लिया और कहा कि तमिलनाडु में इन मौतों के लिए DMK के नेता जिम्मेदार हैं.
पलानीस्वामी ने यह भी कहा कि जब कांग्रेस सरकार में थी, तो DMK ने NEET की शुरुआत की थी और लोगों से यह झूठ बोला था कि अगर DMK सत्ता में आई तो NEET को खत्म कर दिया जाएगा. पलानीस्वामी ने कहा, "न केवल डीएमके ने देश में NEET परीक्षा शुरू की, बल्कि गठबंधन पार्टी के साथ मिलकर इसके खिलाफ बहस करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक गई, जिससे तमिलनाडु के छात्रों के मेडिकल सपनों को नष्ट करने की नींव रखी गई, बल्कि यह कहकर झूठ बोला और धोखा दिया कि 'अगर यह सत्ता में आती है, तो तमिलनाडु में NEET परीक्षा नहीं होगी.'
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दरअसल, शुक्रवार को 21 वर्षीय NEET अभ्यर्थी देवदर्शिनी ने परीक्षा के डर से चेन्नई में अपने घर पर आत्महत्या कर ली. वह तीन बार NEET परीक्षा में असफल रही थी और मई में होने वाली चौथी परीक्षा की तैयारी कर रही थी. पुलिस के अनुसार, देवदर्शिनी ने गुरुवार को NEET कोचिंग क्लास से लौटने के बाद अपने पिता से बात की. उसने बार-बार असफल होने, समय की बर्बादी और परिवार पर आर्थिक बोझ के बारे में चिंता व्यक्त की. उसके पिता ने उसे सांत्वना दी और उसे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा.
शुक्रवार की सुबह, वह अपने माता-पिता की बेकरी में मदद करने के बाद घर लौटी और कहा कि उसे शौचालय जाना है. जब वह वापस नहीं लौटी तो उसके माता-पिता घर पहुंचे और उसे साड़ी के साथ छत से लटकता हुआ पाया.
उसके माता-पिता ने घटना की सूचना पुलिस को दी. जांच जारी है. शव का पोस्टमार्टम किया गया और उसके शव को उसके परिवार को लौटा दिया गया.

लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर बहस में भाग लेते हुए टीडीपी सांसद कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने कहा कि केंद्र सरकार को इस अधिनियम के तहत नियम बनाते समय राज्यों को वक्फ बोर्ड की संरचना तय करने की स्वतंत्रता देने पर विचार करना चाहिए. उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार मुस्लिम महिलाओं, युवाओं और समाज के वंचित तबके के हित में राज्यों को यह अधिकार देने के सुझाव पर गंभीरता से विचार करेगी.

वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में चर्चा हुई. भाजपा ने दावा किया कि विपक्ष मुस्लिम समाज में भ्रम फैला रहा है, जबकि नया बिल पारदर्शिता लाएगा और भ्रष्टाचार रोकेगा. जेडीयू और टीडीपी ने बिल का समर्थन किया, जबकि शिवसेना ने विरोध किया. पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राजीव गांधी शाहबानो मामले में झुके और उसके बाद से कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला.

अमित शाह ने कई सदस्यों की ओर से सदन में कही गई बातें कोट कीं और कहा कि पारदर्शिता से क्यों डरना है. आपने तो कर दिया था कि उसके ऑर्डर को कोर्ट में कोई चैलेंज ही नहीं कर सकता. पूरा संविधान वहीं समाप्त कर दिया था. हम तो कहते हैं कि कोर्ट में कोई भी चैलेंज कर सकता है. कोर्ट के फोरम से बाहर करने का पाप कांग्रेस ने किया था.

वक्फ बिल पर अमित शाह ने कहा कि अल्पसंख्यक कानून से ऊपर नहीं हैं. यहां कोई कह रहा था अल्पसंख्यक मुसलमान इस कानून को नहीं मानेंगे. कानून को स्वीकार नहीं करेंगे मतलब क्या है, ऐसा कोई बोल भी कैसे सकता है? कैसे नहीं मानेंगे भाई, ये संसद में पास किया हुआ भारत सरकार का कानून है, मानना ही पड़ेगा. देखिए VIDEO

सरकार वक्फ़ कानून में संशोधन लाई है जिसमें वक्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा और प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के प्रावधान हैं. इस बिल के तहत वक्फ़ बोर्ड का योगदान 7% से घटाकर 5% किया गया है, जबकि मस्जिदों के लिए 2% बढ़ाया गया है. नए कानून में मुस्लिम ट्रस्टों को वक्फ़ के बजाय ट्रस्ट एक्ट के तहत पंजीकरण की अनुमति दी गई है.