
सौगात-ए-मोदी: 'सबका साथ-सबका विकास' या चुनावी रणनीति... क्या हासिल करना चाहती है बीजेपी?
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बीजेपी इन दिनों राजनीतिक प्रयोग में जुटी है. गरीब मुसलमानों के लिए ईद के मौके पर 'सौगात-ए-मोदी' कैंपेन चलाया जा रहा है. उससे देश की राजनीति में उथल-पुथल मच गई है. विपक्ष इसे इसी साल होने वाले बिहार में और अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों से जोड़कर बीजेपी पर हमलावर है. देखें ये स्पेशल शो.

लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर बहस में भाग लेते हुए टीडीपी सांसद कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने कहा कि केंद्र सरकार को इस अधिनियम के तहत नियम बनाते समय राज्यों को वक्फ बोर्ड की संरचना तय करने की स्वतंत्रता देने पर विचार करना चाहिए. उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार मुस्लिम महिलाओं, युवाओं और समाज के वंचित तबके के हित में राज्यों को यह अधिकार देने के सुझाव पर गंभीरता से विचार करेगी.

वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में चर्चा हुई. भाजपा ने दावा किया कि विपक्ष मुस्लिम समाज में भ्रम फैला रहा है, जबकि नया बिल पारदर्शिता लाएगा और भ्रष्टाचार रोकेगा. जेडीयू और टीडीपी ने बिल का समर्थन किया, जबकि शिवसेना ने विरोध किया. पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राजीव गांधी शाहबानो मामले में झुके और उसके बाद से कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला.

अमित शाह ने कई सदस्यों की ओर से सदन में कही गई बातें कोट कीं और कहा कि पारदर्शिता से क्यों डरना है. आपने तो कर दिया था कि उसके ऑर्डर को कोर्ट में कोई चैलेंज ही नहीं कर सकता. पूरा संविधान वहीं समाप्त कर दिया था. हम तो कहते हैं कि कोर्ट में कोई भी चैलेंज कर सकता है. कोर्ट के फोरम से बाहर करने का पाप कांग्रेस ने किया था.

वक्फ बिल पर अमित शाह ने कहा कि अल्पसंख्यक कानून से ऊपर नहीं हैं. यहां कोई कह रहा था अल्पसंख्यक मुसलमान इस कानून को नहीं मानेंगे. कानून को स्वीकार नहीं करेंगे मतलब क्या है, ऐसा कोई बोल भी कैसे सकता है? कैसे नहीं मानेंगे भाई, ये संसद में पास किया हुआ भारत सरकार का कानून है, मानना ही पड़ेगा. देखिए VIDEO