
दिल्ली विधानसभा में पहली बार हिंदू नव वर्ष का होगा आयोजन, 2500 से ज्यादा लोग होंगे शामिल
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इस समारोह में दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सभी मंत्री भी उपस्थित रहेंगे. कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करना और नई पीढ़ी को इसकी महत्ता से अवगत कराना है. इस कार्यक्रम में 2500 से ज्यादा लोग शामिल होने की संभावना है.
दिल्ली विधानसभा इस बार एक ऐतिहासिक आयोजन की गवाह बनने जा रही है. पहली बार हिंदू नव वर्ष को बड़े स्तर पर मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं. पूरे विधानसभा भवन को सजाया गया है. इस खास मौके को और भी यादगार बनाने के लिए मशहूर गायक कैलाश खेर और उनका बैंड विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है.
इस समारोह में दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सभी मंत्री भी उपस्थित रहेंगे. कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करना और नई पीढ़ी को इसकी महत्ता से अवगत कराना है. इस कार्यक्रम में 2500 से ज्यादा लोग शामिल होने की संभावना है.
पहली बार होगा ऐसा
दिल्ली में यह पहला अवसर है जब किसी सरकार ने हिंदू नव वर्ष को इतने बड़े स्तर पर मनाने की पहल की है. 30 मार्च से 14 अप्रैल तक बीजेपी सरकार कई कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है, जिसमें हिंदू नव वर्ष, नवरात्रि और अन्य हिंदू पर्वों को विशेष रूप से मनाने की योजना है. हर साल अब इसी तरह हिंदू फेस्टिवल वीक मनाया जाएगा, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को और अधिक बढ़ावा मिलेगा.
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पिछली आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए बीजेपी नेता ने कहा कि पहले केवल इफ्तार और इस्लामिक त्योहारों को महत्व दिया जाता था, जबकि नवरात्रि, हिंदू नव वर्ष और अन्य हिंदू पर्व उपेक्षित रहते थे. अब बीजेपी सरकार ने बड़े स्तर पर हिंदू त्योहारों के आयोजन की पहल की है. नवरात्रि को लेकर भी खास तैयारियां की जा रही हैं, जिसमें बड़े स्तर पर फलाहारी कार्यक्रमों का आयोजन शामिल होगा.

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वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में चर्चा हुई. भाजपा ने दावा किया कि विपक्ष मुस्लिम समाज में भ्रम फैला रहा है, जबकि नया बिल पारदर्शिता लाएगा और भ्रष्टाचार रोकेगा. जेडीयू और टीडीपी ने बिल का समर्थन किया, जबकि शिवसेना ने विरोध किया. पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राजीव गांधी शाहबानो मामले में झुके और उसके बाद से कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला.

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वक्फ बिल पर अमित शाह ने कहा कि अल्पसंख्यक कानून से ऊपर नहीं हैं. यहां कोई कह रहा था अल्पसंख्यक मुसलमान इस कानून को नहीं मानेंगे. कानून को स्वीकार नहीं करेंगे मतलब क्या है, ऐसा कोई बोल भी कैसे सकता है? कैसे नहीं मानेंगे भाई, ये संसद में पास किया हुआ भारत सरकार का कानून है, मानना ही पड़ेगा. देखिए VIDEO