
दिल्ली की जेलों में हद से ज्यादा भीड़! 565 की जगह 2,436 कैदी, बेहद खराब हैं हालात
AajTak
दिल्ली की जेलों में ओवरक्राउडिंग एक गंभीर समस्या बन चुकी है. वर्तमान में राजधानी की 16 जेलों में 10,000 कैदियों की क्षमता के मुकाबले करीब 19,000 कैदी बंद हैं. यह स्थिति तब है जब वर्ष 2023 में 1,000 से अधिक अंडरट्रायल कैदियों को रिहा किया गया था. दिल्ली सरकार ने विधानसभा सत्र के दौरान जेलों की स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की, जिसमें तिहाड़, मंडोली और रोहिणी जेलों में कैदियों की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक पाई गई. कुछ जेलों में तो क्षमता से पांच गुना अधिक कैदी रखे गए हैं.
दिल्ली की जेलों में ओवरक्राउडिंग एक गंभीर समस्या बन चुकी है. वर्तमान में राजधानी की 16 जेलों में 10,000 कैदियों की क्षमता के मुकाबले करीब 19,000 कैदी बंद हैं. यह स्थिति तब है जब वर्ष 2023 में 1,000 से अधिक अंडरट्रायल कैदियों को रिहा किया गया था.
दिल्ली सरकार ने विधानसभा सत्र के दौरान जेलों की स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की, जिसमें तिहाड़, मंडोली और रोहिणी जेलों में कैदियों की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक पाई गई. कुछ जेलों में तो क्षमता से पांच गुना अधिक कैदी रखे गए हैं.
तिहाड़ जेल जहां सबसे ज्यादा कैदी
तिहाड़ की जेल नंबर 1 की स्थिति सबसे खराब है. इस जेल की क्षमता केवल 565 कैदियों की है, लेकिन मार्च 2025 के आंकड़ों के अनुसार, यहां 2,436 कैदी बंद हैं. इसी तरह, तिहाड़ की जेल नंबर 4 में 740 कैदियों की जगह 3,244 कैदी रखे गए हैं.
मंडोली जेल के कुछ परिसरों में कैदियों की संख्या अपेक्षाकृत कम है. उदाहरण के लिए, जेल नंबर 15, जिसमें सिर्फ उच्च सुरक्षा वाले कैदी रखे जाते हैं, की क्षमता 248 कैदियों की है, लेकिन वहां केवल 108 कैदी बंद हैं. इसी तरह, जेल नंबर 14 और 16 में भी क्षमता से कम कैदी हैं.
अंडरट्रायल कैदियों की संख्या आठ गुना ज्यादा

लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर बहस में भाग लेते हुए टीडीपी सांसद कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने कहा कि केंद्र सरकार को इस अधिनियम के तहत नियम बनाते समय राज्यों को वक्फ बोर्ड की संरचना तय करने की स्वतंत्रता देने पर विचार करना चाहिए. उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार मुस्लिम महिलाओं, युवाओं और समाज के वंचित तबके के हित में राज्यों को यह अधिकार देने के सुझाव पर गंभीरता से विचार करेगी.

वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में चर्चा हुई. भाजपा ने दावा किया कि विपक्ष मुस्लिम समाज में भ्रम फैला रहा है, जबकि नया बिल पारदर्शिता लाएगा और भ्रष्टाचार रोकेगा. जेडीयू और टीडीपी ने बिल का समर्थन किया, जबकि शिवसेना ने विरोध किया. पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राजीव गांधी शाहबानो मामले में झुके और उसके बाद से कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला.

अमित शाह ने कई सदस्यों की ओर से सदन में कही गई बातें कोट कीं और कहा कि पारदर्शिता से क्यों डरना है. आपने तो कर दिया था कि उसके ऑर्डर को कोर्ट में कोई चैलेंज ही नहीं कर सकता. पूरा संविधान वहीं समाप्त कर दिया था. हम तो कहते हैं कि कोर्ट में कोई भी चैलेंज कर सकता है. कोर्ट के फोरम से बाहर करने का पाप कांग्रेस ने किया था.

वक्फ बिल पर अमित शाह ने कहा कि अल्पसंख्यक कानून से ऊपर नहीं हैं. यहां कोई कह रहा था अल्पसंख्यक मुसलमान इस कानून को नहीं मानेंगे. कानून को स्वीकार नहीं करेंगे मतलब क्या है, ऐसा कोई बोल भी कैसे सकता है? कैसे नहीं मानेंगे भाई, ये संसद में पास किया हुआ भारत सरकार का कानून है, मानना ही पड़ेगा. देखिए VIDEO

सरकार वक्फ़ कानून में संशोधन लाई है जिसमें वक्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा और प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के प्रावधान हैं. इस बिल के तहत वक्फ़ बोर्ड का योगदान 7% से घटाकर 5% किया गया है, जबकि मस्जिदों के लिए 2% बढ़ाया गया है. नए कानून में मुस्लिम ट्रस्टों को वक्फ़ के बजाय ट्रस्ट एक्ट के तहत पंजीकरण की अनुमति दी गई है.