![हिंडनबर्ग रिसर्च के फाउंडर ने लिया कंपनी बंद करने का फैसला, X पर भावुक पोस्ट में दी जानकारी](https://akm-img-a-in.tosshub.com/aajtak/images/story/202501/678849ca435aa-hindenburg-research--short-selling-firm--hindenburg-research-to-shut-down--hindenburg-research-news-155028631-16x9.jpeg)
हिंडनबर्ग रिसर्च के फाउंडर ने लिया कंपनी बंद करने का फैसला, X पर भावुक पोस्ट में दी जानकारी
AajTak
नाथन एंडरसन ने अपने संदेश में लिखा कि मैंने पिछले साल के अंत में ही अपने परिवार, दोस्तों और हमारी टीम के साथ ये बात शेयर की थी कि मैं हिंडनबर्ग रिसर्च को बंद करने का निर्णय ले रहा हूं. हमने जो विचार किए किए थे, उन्हें पूरा करने के बाद इसे खत्म करना था. आज आखिरी मामलों को नियामकों के साथ शेयर करने के बाद वो दिन आ गया है.
हिंडनबर्ग रिसर्च के संस्थापक ने अपनी कंपनी को बंद करने का फैसला लिया है. उन्होंने ये जानकारी X पर एक भावुक पोस्ट के जरिए दी. जिसमें उन्होंने अपने सफर, संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बताया.
नाथन एंडरसन ने अपने संदेश में लिखा कि मैंने पिछले साल के अंत में ही अपने परिवार, दोस्तों और हमारी टीम के साथ ये बात शेयर की थी कि मैं हिंडनबर्ग रिसर्च को बंद करने का निर्णय ले रहा हूं. हमने जो विचार किए किए थे, उन्हें पूरा करने के बाद इसे खत्म करना था. आज आखिरी मामलों को नियामकों के साथ शेयर करने के बाद वो दिन आ गया है.
एंडरसन ने अपने शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए बताया कि मुझे शुरू में नहीं पता था कि क्या कोई संतोषजनक रास्ता खोजना संभव होगा, यह एक आसान विकल्प नहीं था, लेकिन मैं खतरे के प्रति भोला था और बहुत तेजी से इस काम की ओर आकर्षित हुआ. जब मैंने इसे शुरू किया तो मुझे डाउट था कि क्या मैं इसके लिए सक्षम हूं. क्योंकि मेरे पास पारंपरिक अनुभव नहीं था. मेरे कोई भी रिश्तेदार इस क्षेत्र में नहीं हैं. मैं एक सरकारी स्कूल में गया था. मैं एक चालाक विक्रेता नहीं हूं. मुझे पहनने के लिए सही कपड़ों के बारे में नहीं पता. मैं गोल्फ नहीं खेल सकता. मैं कोई सुपरह्यूमन नहीं हूं, जो 4 घंटे की नींद लेकर काम कर सकता है.
नाथन ने लिखा कि अपनी ज़्यादातर नौकरियों में मैं एक अच्छा कर्मचारी था, लेकिन ज़्यादातर में मेरी अनदेखी की जाती थी. जब मैंने ये काम शुरू किया तो मेरे पास पैसे नहीं थे, और गेट से बाहर निकलते ही 3 मुकदमे लगने के बाद मेरे पास बचे पैसे भी खत्म हो गए. अगर मुझे विश्व स्तरीय व्हिसलब्लोअर वकील ब्रायन वुड का समर्थन न मिलता, जिन्होंने मेरे वित्तीय संसाधनों की कमी के बावजूद मामले को संभाला, तो मैं शुरूआती लाइन पर ही असफल हो जाता. मेरा एक नवजात बच्चा था और उस समय मुझे बेदखली का सामना करना पड़ रहा था. मैं डरा हुआ था, लेकिन जानता था कि अगर मैं स्थिर रहा तो मैं टूट जाऊंगा. मेरे पास एकमात्र विकल्प आगे बढ़ते रहना था.
'नकारात्मक विचारों के आगे झुकना आसान' एंडरसन ने लिखा कि नकारात्मक विचारों के आगे झुकना और दूसरों की सोच पर विश्वास करना बहुत आसान है, खासकर तब, जब चीजें खराब लगती हैं, लेकिन इससे निकलना संभव है. मैं इसे लेकर भावुक था और मैंने अपने डर और असुरक्षाओं के बावजूद इसे आगे बढ़ने दिया. और फिर यह धीरे-धीरे फलने-फूलने लगा. एक-एक करके, और बिना किसी क्लियर प्लानिंग के हमने 11 अविश्वसनीय लोगों की एक टीम बनाई. मैंने उनमें से प्रत्येक को इसलिए काम पर नहीं रखा, क्योंकि हमें कर्मचारियों की ज़रूरत थी, बल्कि इसलिए क्योंकि जब हमारे रास्ते मिले और मैंने देखा कि वे कौन हैं, तो मुझे एहसास हुआ कि उन्हें काम पर न रखना पागलपन था. वे सभी स्मार्ट, केंद्रित और काम करने में मज़ेदार हैं. जब आप उनसे मिलते हैं, तो वे सभी बहुत अच्छे और विनम्र होते हैं, लेकिन जब इस क्षेत्र की बात आती है, तो वे निर्दयी होते हैं. जो विश्व स्तरीय काम करने में सक्षम हैं. मेरी तरह, हमारी टीम का पारंपरिक फाइनेंशियल बैकग्राउंड नहीं था. मेरा पहला कर्मचारी अक्सर खुद को पूर्व बारटेंडर के रूप में बताता है. हम सभी का दुनिया के बारे में एक जैसा नज़रिया है, हम सभी का बाहरी रूप शांत है वे सभी मेरे लिए परिवार हैं.
'हमने अपने काम से कुछ साम्राज्यों को हिला दिया'
![](/newspic/picid-1269750-20250213133350.jpg)
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन आधिकारिक यात्रा पर गुरुवार को पाकिस्तान पहुंचे हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन का गर्मजोशी से स्वागत किया है. एर्दोगन और शहबाज शरीफ की मुलाकात के दौरान कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई है. दोनों देशों के बीच 24 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं. वहीं इस दौरान शहबाज शरीफ और तैय्यप एर्दोगन ने कश्मीर का राग भी अलापा है.
![](/newspic/picid-1269750-20250213124223.jpg)
भारत रूस से सस्ता तेल खरीदता है तो अमेरिका को दिक्कत है, भारत ईरान से अपने संबंध प्रगाढ़ करता है तो अमेरिका को दिक्कत है, लेकिन दक्षिण चीन सागर में भारत जब चीन के विस्तारवाद को चुनौती देता है तो अमेरिका इसे पसंद करता है. दरअसल अमेरिकी विदेश नीति का एक ही मकसद होता है 'US फर्स्ट'. अमेरिका की ये महात्वाकांक्षा भारत के हितों के साथ कई बार टकराती है.
![](/newspic/picid-1269750-20250213115022.jpg)
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साई ने पूरी कैबिनेट के साथ प्रयागराज के महाकुंभ में स्नान किया. उन्होंने बताया कि हम सभी लोगों ने संगम में स्नान किया और छत्तीसगढ़ की खुशहाली के लिए कामना की. भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा 'जो लोग भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं उनसे उम्मीद नहीं.