झारखंडः सूबे में गहरा रहा भाषा का विवाद, CM हेमंत सोरेन, सांसद और विधायक की 'शवयात्रा' निकाली, 11 लोगों ने कराया मुंडन
AajTak
झारखंड भाषा संघर्ष समिति ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत धनबाद में राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और स्थानीय विधायकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. इस दौरान सैकड़ों महिला-पुरुष ढोल नगाड़ों और झारखंडी नृत्य किया.
झारखंड में क्षेत्रीय भाषा की मान्यता को लेकर राज्य में जारी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. इसके तहत धनबाद में झारखंड भाषा संघर्ष समिति आंदोलन कर रही है. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जिले के विधायक और सांसद के साथ मंत्रियों की शवयात्रा निकली गई. इतना ही नहीं प्रदर्शन करने वाले लोगों ने सड़क पर मुंडन करवाया. विवाद तब शुरू हुआ, जब झारखंड सरकार ने नियोजन में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा को शामिल कर लिया.
पाकिस्तान में इमरान खान की अपील पर उनके समर्थक विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. वे डी-चौक तक मार्च करना चाहते थे, लेकिन उन्हें कंटेनर लगाकर बीच में ही रोक दिया गया है. दरअसल, इस क्षेत्र में संसद, पीएम और राष्ट्रपति का कार्यालय, और सुप्रीम कोर्ट भी है. यहां से एक चौंका देने वाला वीडियो सामने आया है, जहां सेना के जवान ने नमाज पढ़ रहे एक शख्स को कंटेनर से नीचे फेंक दिया.
डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हम लगेज पॉलिसी लेकर आए हैं, जब भी हम कुछ लागू करते हैं, तो हमें सुझाव मिलते हैं, जनता की मांग थी कि दूध और सब्जी का उत्पादन करने वाले या सप्लाई करने वाले किसानों को हमारी बसों में रियायत दी जाए, हमने उनकी मांग को स्वीकार किया और दूध और सब्जी सप्लायरों के लिए टिकट हटा दिए हैं.
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एहतियाती उपायों की समीक्षा के लिए सचिवालय में हाईलेवल बैठक बुलाई. इस दौरान भारी बारिश की संभावना वाले क्षेत्रों में NDRF और SDRF की टीमों को तैनात करने का निर्देश दिया. कुल 17 टीमों को तैनात किया गया है, इसमें चेन्नई, तिरुवरुर, मयिलादुथुराई, नागपट्टिनम और कुड्डालोर और तंजावुर जिले शामिल हैं.
हिंदू संगठन 'बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोते' एक बयान में कहा कि वकील सैफुल इस्लाम की हत्या में कोई सनातनी शामिल नहीं है. एक समूह सुनियोजित हत्या को अंजाम देकर सनातनियों पर दोष मढ़ने की कोशिश की जा रही है. हिंदू संगठन ने चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की तत्काल बिना शर्त रिहाई और चिटगांव हिंसा की न्यायिक जांच की मांग की है.