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भंसाली की प्रेम कहानियां, हीरामंडी से पहले भी पर्दे पर भंसाली ने दिखाया गम में डूबा अधूरा इश्क
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एक लव स्टोरी का पूरा होने का मतलब है तमाम रुकावटों को लांघकर प्रेमियों का मिलना और फिर राजी-खुशी एक दूसरे के साथ जिंदगी बिताना. मगर भंसाली का सिग्नेचर है प्रेमियों का अंत में न मिल पाना. उनका ये ट्रेडमार्क स्टाइल, 'हीरामंडी' की 4 लव स्टोरीज में उतरा है.
डायरेक्टर संजय लीला भंसाली का नाम इन दिनों सिनेमा लवर्स की चर्चाओं में लगातार बना हुआ है. उनकी डेब्यू वेब सीरीज 'हीरामंडी' नेटफ्लिक्स पर आ चुकी है और ऑडियंस को भारत की आजादी से पहले के दौर की तवायफों की ये कहानी खूब इम्प्रेस कर रही है.
'हीरामंडी' में नवाबों, तवायफों और आजादी की जंग के त्रिकोण में चल रही कहानी तो है ही. मगर इसमें भंसाली की सिग्नेचर लव स्टोरीज भी हैं. बॉलीवुड के फिल्ममेकर्स में यहां यश चोपड़ा, करण जौहर और इम्तियाज अली जैसे डायरेक्टर्स फिल्मों में लव स्टोरीज के लिए मशहूर हैं. वहीं भंसाली भी इंडियन सिनेमा को कुछ बेहद आइकॉनिक लव स्टोरीज दे चुके हैं. मगर क्या भंसाली की फिल्मी कहानियां वाकई में लव स्टोरीज ही हैं?
सिग्नेचर भंसाली स्टाइल- प्यार की बहार नहीं, बिछोह के दर्द का किस्सागो संजय लीला भंसाली की डायरेक्ट की हुई पहली फिल्म 'खामोशी: द म्यूजिकल' एक विशुद्ध लव स्टोरी थी. मनीषा कोइराला और सलमान खान स्टारर इस फिल्म की लव स्टोरी, हीरोईन के सुन-बोल न पाने वाले पेरेंट्स और धर्म की दीवार लांघकर पूरी हुई. यहां ये नोशन काम करता है कि एक लव स्टोरी का पूरा होने का मतलब है तमाम रुकावटों को लांघकर प्रेमियों का मिलना और फिर राजी-खुशी एक दूसरे के साथ जिंदगी बिताना. बहुत सारे तरीकों से, 'खामोशी' अपने दौर की एक रूटीन लव स्टोरी तो नहीं कही जा सकती. मगर ये जरूर था कि फिल्म में एनी (मनीषा) और राज (सलमान) का इश्क 'हैप्पी एंडिंग' तक पहुंचता जरूर है.
अपनी दूसरी ही फिल्म से भंसाली ने लव स्टोरीज का वो एंगल दिखाना शुरू किया, जिसे मेनस्ट्रीम बॉलीवुड फिल्मों में बहुत नहीं आजमाया गया था- प्रेमियों का बिछड़ना. 'हम दिल दे चुके सनम' में भंसाली एक लवर्स समीर (सलमान खान) और नंदिनी (ऐश्वर्या राय) का इश्क 'आंखों की गुस्ताखियों' से शुरू होकर पूरे रंग में, बागी तेवर के साथ आगे बढ़ा. मगर ट्विस्ट ऐसा आया कि नंदिनी ने अंत में अपने पति वनराज (अजय देवगन) को चुना. जबकि समीर ने नंदिनी को बिना रोके खुशी-खुशी जाने तो दिया, मगर उसके दिल से 'तड़प-तड़प के' आह निकलती ही रही.
इसके बाद भंसाली ने 'देवदास' बनाई, जिसमें देव (शाहरुख खान) अपनी प्रेमिका पारो (ऐश्वर्या राय) की चौखट पर उसका नाम लेकर मर गया. इसी तरह 'ब्लैक', सांवरिया', 'गुजारिश' में भी भंसाली की लीड किरदारों का इश्क जितना जोरदार रहा, उनकी कहानी का अंत उतना ही ट्रैजिक हुआ. 'राम लीला' में भंसाली के लवर्स को समझ आ गया था कि उनकी मोहब्बत, उनके जिंदा रहते तो नफरतों का दरिया पर कर ही नहीं पाएगी. तो उन्होंने के दूसरे को गोली मार दी. वहीं 'बाजीराव मस्तानी' में बाजीराव (रणवीर सिंह) को इश्क के 'रोग' ने मार दिया.
'पद्मावत' में रतन सिंह और पद्मावती का प्रेम पूरा जरूर हुआ, मगर उनकी 'हैप्पी एंडिंग' मिसिंग रही. रतन सिंह (शहीद कपूर) की मौत अलाउद्दीन खिलजी के साथ युद्ध में हो जाती है. जबकि पद्मावती (दीपिका पादुकोण) को छीनने का उसका सपना जौहर की आग में जल जाता है. खिलजी युद्ध तो जीत जाता है, मगर पद्मावती के लिए उसका ऑब्सेशन नहीं जीत पाता!
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