
गुजरात की ऊना विधानसभा सीट: यहां मजबूत रही है 'पंजे' की पकड़, बस एक बार ही खिला 'कमल'
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Gujarat Vidhan Sabha Chunav: पिछले ढाई दशक से गुजरात की सत्ता पर बीजेपी का कब्जा बरकरार है. हालांकि, कुछ सीटें ऐसी भी हैं, जहां आज तक बीजेपी का दबदबा नहीं बन पाया है. इनमें से एक सीट ऊना भी है. यहां बीजेपी ने 1962 के पहले चुनाव से लेकर 2017 के चुनाव तक केवल एक बार ही जीत हासिल की है.
गुजरात की ऊना विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है. यहां कांग्रेस का दबदबा रहा है. हालांकि, बदलते समय में कांग्रेस के लिए इस सीट पर टिके रहना आसान नहीं है. आइए आपको बताते हैं ऊना विधानसभा क्षेत्र के बारे में, जहां 1962 से 2017 तक हुए चुनाव में खासकर सौराष्ट्र में किसी जाति नहीं, बल्कि उम्मीदवार की कार्यशैली महत्वपूर्ण रही है.
मतदाताओं का समीकरण
ऊना सीट के ज्यादातर गांव समुद्र तट के किनारे बसे हैं. इस सीट के अधिकांश गांव गिर के जंगल में बसे हैं. ऊना निर्वाचन क्षेत्र में कुल 79 हजार 512 मतदाता हैं. इनमें 40 हजार 726 पुरुष और 38 हजार 786 महिला मतदाता हैं. इस सीट पर कोली समुदाय अधिक प्रभाव रखता है.
खास बात ये है कि इस सीट पर कोली समुदाय के लोग पाटीदारों का समर्थन करने के मूड में दिख रहे हैं. शायद गुजरात में पहली बार पटेल और कोली नेता एकजुट नजर आ रहे हैं. इस वजह से इन दोनों समाजों के वर्चस्व वाली सीट काफी अहम हो गई है.
क्या है सियासी समीकरण
पिछले ढाई दशक से गुजरात की सत्ता पर बीजेपी का कब्जा है. हालांकि, कुछ सीटें ऐसी भी हैं, जहां आज तक बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत नहीं कर पाई है. इनमें से एक सीट ऊना भी है. यहां बीजेपी ने 1962 के पहले चुनाव से लेकर 2017 के चुनाव तक केवल एक बार जीत हासिल की है.

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